पिथौरागढ़ की उन्नति: सच्चाई या ढोंग ?


  • Written By - Deepak Upreti Published On Feb 29, 2020

किसी भी देश की उन्नति तभी संभव मानी जाती है जब उस देश के आखिरी पंक्ति में खड़े नागरिक तक कम से कम मूलभूत सुविधाएं पहुँच जाती हैं। यह पंक्ति न केवल देश अपितु राज्य और फिर मूल स्तर पर एक उन्नत शहर के लिए भी लागू होती है। अब अगर पूछा जाए की मूलभूत सुविधायें क्या हो सकती हैं? तो आज के समय के हिसाब से रोटी, कपड़ा और मकान के बाद शायद शिक्षा और स्वास्थय ही सबसे महत्त्वपूर्ण हैं।
अब बात करें हमारे पिथौरागढ़ की जिसको कई बार एक हिल स्टेशन के रूप में विकसित करने की बात करी जाती है। हवाई अड्डा तैयार किया जा रहा है जों पिछले दो दशकों से तैयार ही हो रहा है और आज भी निरंतर सेवा कैसी मिल रही है हम सबको पता है। चंडाक में टुलिप गार्डन का निर्माण किया जा रहा है जों नगर में पर्यटन को बढ़ावा देगा जिससे पिथौरागढ़ एक सुन्दर हिल स्टेशन के रूप में जाना जायेगा, चलिए मान भी लें एसा हो जाए अब सवाल ये उठता है जब हमारे नगर का एक बड़ा हिस्सा मूल सुविधाओं से ही वंचित है तो न जाने हिल स्टेशन बनने का कितना फायदा हमारे नागरिकों को मिलेगा? पिछले दिनों में हमारे जिले की स्वास्थय व्यवस्था की जों स्थिति सामने आई है वह दिखाती है स्वास्थय व्यवस्था का ढांचा किस तरह से चरमराया हुआ है। जनवरी के माह में खबर सामने आई की सरकार ने दो सचल स्वास्थ्य सेवाए दे रहे वाहनों और चार अस्पताल जिनमे एक पिथौरागढ़ का टीबी अस्पताल भी शामिल है, और दो अस्पताल मुख्या नगर से बहरी इलाको में आते हैं इनको बंद कार दिया है, इसका कारण स्टाफ की कमी को बताया गया था। फिर पिछले माह ही महिला जिला चिकित्सालय में जिस प्रकार से आकस्मिक घटनाएं घटी जिसमे मात्र 20 दिनों के अंदर ही तीन मृत्यु हुईं इन घटनाओं ने पूरे जिले को क्षोभ तथा क्रोध से भर दिया। अब खबर हमारे जिला चिकित्सालय से आ रही है जहाँ 5 नर्सो के एक साथ छुट्टी लेने के कारण पेइंग वार्ड बंद कर दिया गया है।



जिला चिकित्सालय जिस पर न केवल मुख्य नगर अपितु आस पास के ग्रामीण क्षेत्रों के निवासी जों प्राइवेट चिकित्सा सेवाओं का वहन नहीं उठा सकते वे सभी स्वास्थय सेवाओं के लिए पूरी तरह निर्भर हैं उसी जिला चिकित्सा के पेइंग वार्ड में ताला लटक रहा है। खबर यह भी है की जिला अस्पताल में नर्सों के 19 पद स्वीकृत हैं जिनपे केवल 15 नर्से ही कार्यरत हैं जिनमे से भी एक साथ 5 नर्सों के एक साथ छुट्टी लेने के कारण शुक्रवार पेइंग वार्ड में ताला लग गया। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार सालों में संसंधानो की कमी के कारण जिला अस्पताल में 50 से अधिक मौतें हो चुकी हैं।

अब सवाल ये उठता है की इन सब ख़बरों से आपको हमको क्या फर्क पड़ता है? हम तो मुख्य नगर में रहते हैं सीमान्त क्षेत्रों में क्या स्थिति है हमे उससे क्या ? हम में से ज्यादातर प्राइवेट चिकित्सा वहन कर सकते हैं जरूरत पड़ने पर हल्द्वानी देहरादून या दिल्ली भी जा सकते हैं, हमें क्या मतलब जिला चिकित्सा में क्या हालत है। कोई भी दुर्घटना घटने पर सोशल मीडिया पे चिकित्सको प्रशाशन तथा सरकार पर आरोप लगा के कुछ कमेंट्स करके हम अपना दायित्व पूरा कर देते है। एक नागरिक होने के नाते हम कितनी बार सरकार से प्रश्न करते हैं? केवल स्वास्थय व्यवस्था को लेकर ही नही अपितु सभी मूलभूत सुविधाओं को लेकर, शायद बहुत कम या फिर बिकुल भी नहीं। 'अजी' किसको समय है सबके अपने अपने काम हैं - ऐसे ही वाकय सुनने को मिलते रहते हैं। केवल सरकार प्रशाशन या चिकित्सक को दोष देकर दो चार कमेंट करके ही हम बदलाव ला पाएंगे सबसे पहले हमे खुद की सोच में बदलाव लाना होगा। हो सकता है हम प्राइवेट चिकित्सा वहन कर सकते हैं, अपने परिजनों को अच्छी स्वास्थय सेवाए मुहैया करा सकते हैं पर जब हमे उस ग्राम्में और समाज की आखिरी पंक्ति मों खड़े नागरिक के दर्द से दुःख होगा तब शायद हम खुद सरकार व् प्रशाशन से प्रश्न करेंगे और निरंतर प्रश्न करेंगे तब शायद हमारा यह खूबसूरत नगर वास्तव में उन्नति कर सकेगा।

Leave a Reply