पिथौरागढ़ के कासनी में स्थित विष्णु मंदिर की विशेषता


  • Written By - Manish Kashniyal Published On Jan 7, 2020

पिथौरागढ़ जनपद से 3 किमी की दूरी पर ग्राम कासनी के मध्य, जनपद पिथौरागढ़ का सबसे विशाल दस अवतार विष्णु का भव्य तीन मंदिरों का समूह है, जिसके मुख्य मन्दिर के गर्भ ग्रह में भगवान विष्णु की विशाल प्रतिमा विराजमान है। ग्रामीणों द्वारा इसे लक्ष्मी नारायण मन्दिर नाम से जाना जाता है। पुरातात्विक इकाई अल्मोड़ा/पुरातात्विक विभाग नई दिल्ली व राजकीय महाविद्यालय में इतिहास विभाग में कार्यरत डॉ हेम चन्द्र पाण्डे जी के आधार पर यह मंदिर 11वीं सदी के मध्य का है,यह मंदिर स्थानीय ग्रेनाईट प्रस्तर खण्डों का बना है और यहाँ नागर शैली में स्तम्भ हितरेखा प्रसाद श्रेणी के देवालयों की तलछंद योजना में दो भागो का विधान किया गया है, गर्भग्रह, अंतराल एवं उर्ध्वछन्द योजना में वेदीबन्ध त्रीरथ विन्यास की जंघा निर्मित है और शिखर का क्रम बनाया गया है। वैदिक आश्रमों की पृष्टभूमि एवं पावन यात्रा पथ के समीप निर्मित उक्त जनपदद्वय के देवालय परिसरों को तीन भागो में विभाजित किया गया है। १-देवकुल, २-आश्रम, ३-पंचायतन। देवकुल परिसर में मुख्य देव मंदिर के समीप ही सम्पूर्ण देव परिवार अथवा अन्य देवो हेतु लघु देवालय एक परिसर में निर्मित है, मन्दिर के गर्भग्रह में विशाल विष्णु की प्रतिमा, गुप्तकाल में भगवत धर्म में अवतारवाद का वृहत प्रचलन हुआ, वैष्णव साहित्य में पूर्णवतार, अंशावतार एवं आवेशावतार का उल्लेख है मुख्यतः दस अवतार। Card Image इस देवालय में विष्णु के दस अवतारों की प्रतिमाओं की श्रंखला भी है व इस के अतिरिक्त दुर्गा, गणेश, सरस्वती, लक्ष्मी, गज आदि के अतिरिक्त विष्णु प्रतिमा द्वारा हाथों में शंख,कमल,गदा,चक्र धारण किये है। इस के अतिरिक्त महिषासुर मर्दिनि, उमा महेश, भवानी,आदि की प्रतिमाएं भी इस ग्राम के अन्य मंदिरों में विराजमान हैं। कासनी गांव के लोगों को विष्णु मन्दिर में पूजा अर्चना व देख रेख के लिए स्थानीय निवासी कसनीयालों के पूर्वजों को कत्यूरी राजवँश द्वारा काशी से लाया गया था और यह काशी के विशेष पंडितो में से थे। मंदिर के गर्भग्रह की मूर्ति सबसे बड़ी है, इस मूर्ति में नारायण भगवान,के दस अवतारों का विशेष समूह हैं। जिसमे मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार,वाराह अवतार,नृसिंह अवतार,वामन अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार, कृष्ण अवतार, बुद्ध अवतार, कल्कि अवतार,देखें जा सकते हैं। पुरातात्विक ईकाई के अनुसार उत्तराखंड में यह एक अकेला विष्णु मन्दिर हैं जिसमे एक साथ दस अवतार विराजमान है। मंदिर में प्रत्येक दिन और विशेष अवसरों पर पूजा-पाठ होता है लेकिन आश्विन के महीने में पंचमी के दिन इस मंदिर में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है,गांव वाले अपनी नई फसल को सबसे पहले मंदिर में चढ़ाते हैं व उसके पश्चात अपने प्रयोग में लाते हैं और दिवाली के दिन भी ग्रामीणों द्वारा सबसे पहले इसी मंदिर में पूजा अर्चना की जाती है। Card Image विष्णु मंदिर से ठीक उत्तर की तरफ हिमालय का विहंगम दृश्य अपने आप में ऊर्जा का केंद्र है, वही से २०० मीटर की दुरी में २ नौले निर्मित है जो खेतों से घिरे हुए हैं इस नज़ारे में चार चाँद लगा देते है,समस्त ग्रामीणों द्वारा इस का प्रयोग किया जाता व देव कार्यो में भी इन्ही का जल चढ़ाया जाता है। पुरात्व विभाग की प्रस्तावित धरोहर में होने के बावजूद भी गाँव वालों ने आपस में धन एकत्रकर मंदिर का रखरखाव किया जा रहा है व इसे अन्तराष्ट्रीय पटल पर लाने के लिए भी ग्राम प्रधान श्री सुरेश चन्द्र कसनियाल व बी.डी. कसनियाल जी के नेतृत्व में मंदिर के रख-रखाव के लिये व इसे विशेष पर्यटन स्थल के रूप में आम जन-मानस तक लाने के लिए भी इसकी रिपोर्ट शासन, प्रशासन तक भी समय समय पर भेजी जाती है जिसमे फिल्हाल अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई है।

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